इंसानी शरीर एक अद्भुत मशीन है, जो प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर काम करती है। अक्सर लोग मान लेते हैं कि सोते समय लाइट जलाना सामान्य है, लेकिन विज्ञान के अनुसार रात में प्रकाश शरीर की प्राकृतिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है।
शरीर की आंतरिक घड़ी
दिमाग में एक शक्तिशाली सिस्टम होता है, जिसे सर्केडियन रिदम कहते हैं। यह 24 घंटे सक्रिय रहती है और शरीर को जागने और सोने के संकेत देती है। आंखों के जरिए रोशनी रेटिना तक पहुँचती है, जहाँ विशेष कोशिकाएं दिमाग को संदेश भेजती हैं। दिमाग इसे “दिन” का संकेत मानता है और शरीर सतर्क रहता है, जबकि अंधेरा आने पर सोने का संकेत मिलता है।
मेलाटोनिन – नींद का हार्मोन
मेलाटोनिन, जिसे स्लीप हार्मोन भी कहा जाता है, नींद के नियंत्रण में सबसे महत्वपूर्ण है। अंधेरा होने पर पीनियल ग्रंथि मेलाटोनिन का निर्माण बढ़ाती है, जिससे शरीर सुस्ती महसूस करता है और गहरी नींद आती है। रोशनी के संपर्क में आने पर मेलाटोनिन का उत्पादन कम हो जाता है, जिससे नींद खुल सकती है।
कृत्रिम लाइट और ब्लू लाइट का प्रभाव
पुराने समय में लोग सूरज की रोशनी और अंधेरे के अनुसार सोते थे। आज ऑफिस की तेज लाइटें, स्ट्रीटलाइट्स और स्मार्टफोन/लैपटॉप की स्क्रीन इस संतुलन को बिगाड़ती हैं। इनसे निकलने वाली ब्लू लाइट दिमाग को भ्रमित करती है और मेलाटोनिन के निर्माण को रोक देती है।
नींद की कमी से होने वाले खतरे
बार-बार नींद में बाधा डालने वाली लाइट के कारण:
- मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है और वजन बढ़ सकता है
- दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है
- तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है
- शरीर की मरम्मत और रिकवरी प्रभावित हो सकती है
गहरी और स्वास्थ्यवर्धक नींद के लिए अंधेरा आवश्यक है।
बेहतर नींद के उपाय
विशेषज्ञ सुझाव देते हैं:
- बेडरूम को शांत और अंधेरा रखें।
- सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप बंद करें।
- यदि रोशनी चाहिए, तो हल्की पीली या लाल लाइट का उपयोग करें।
- कमरे को जितना संभव हो डार्क रखें ताकि नींद गहरी हो।
निष्कर्ष: नींद केवल आराम नहीं बल्कि शरीर की एक जैविक आवश्यकता है। यदि पूरी अंधेरी जगह में भी नींद नहीं आ रही है, तो किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।






