नई या पुरानी टैक्स रीजीम? बजट 2026 के बाद किसमें बचेगा ज्यादा टैक्स

केंद्रीय बजट 2026 के बाद इनकम टैक्स एक बार फिर चर्चा में है। जहां कई टैक्सपेयर्स को टैक्स स्लैब में बदलाव या नई राहत की उम्मीद थी, वहीं सरकार ने टैक्स ढांचे को बिना किसी बड़े बदलाव के बरकरार रखा है। ऐसे में नई और पुरानी टैक्स रीजीम को लेकर दुविधा अब भी बनी हुई है।

टैक्स स्लैब जस के तस, सिस्टम में स्थिरता

FY 2026–27 के लिए नई टैक्स रीजीम के स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

  • ₹4 लाख तक की आय टैक्स फ्री
  • ₹4 से ₹8 लाख तक 5% टैक्स
  • ₹8 से ₹12 लाख तक 10% टैक्स
  • ₹24 लाख से ऊपर 30% टैक्स

यह फैसला टैक्स सिस्टम में स्थिरता दिखाता है, लेकिन नई राहत नहीं देता।

12 लाख तक की आय पर टैक्स शून्य

नई टैक्स रीजीम में ₹12 लाख तक की सालाना आय पर पूरा टैक्स रिबेट मिलता है।
सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के चलते यह सीमा ₹12.75 लाख तक पहुंच जाती है। यही वजह है कि कम डिडक्शन वालों के लिए नया सिस्टम ज्यादा फायदेमंद माना जा रहा है।

नई टैक्स रीजीम क्यों है आसान

  • कम टैक्स रेट
  • कोई जटिल डिडक्शन नहीं
  • आसान टैक्स फाइलिंग
  • कम कागजी कार्रवाई

जो लोग ज्यादा टैक्स सेविंग इनवेस्टमेंट नहीं करते, उनके लिए यह सिस्टम बेहतर विकल्प बनता है।

ज्यादा छूट वालों के लिए पुरानी टैक्स रीजीम

पुरानी टैक्स रीजीम उन टैक्सपेयर्स के लिए अब भी फायदेमंद है जो HRA, 80C, 80D, NPS, होम लोन और LTA जैसी छूट का पूरा फायदा उठाते हैं।
अगर आपकी कुल डिडक्शन ₹7–8 लाख या उससे ज्यादा है, तो पुराना सिस्टम टैक्स बचाने में मददगार हो सकता है।

किसे क्या चुनना चाहिए

  • ₹12 लाख तक की आय: नई टैक्स रीजीम
  • कम डिडक्शन वाले सैलरीड कर्मचारी: नई रीजीम
  • ज्यादा इनकम और ज्यादा डिडक्शन: पुरानी रीजीम

बजट 2026 की अन्य टैक्स राहतें

  • MACT ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री
  • संशोधित ITR की अंतिम तारीख 31 मार्च
  • LRS के तहत TCS में राहत
  • आसान ITR फॉर्म जल्द आने की उम्मीद

निष्कर्ष

भले ही टैक्स स्लैब में बदलाव न हुआ हो, लेकिन सही टैक्स रीजीम चुनकर अब भी बड़ी बचत संभव है। बजट 2026 के बाद फैसला आपकी इनकम और डिडक्शन पर पूरी तरह निर्भर करता है।