डिजिटल अरेस्ट का खौफ: हैदराबाद में 7 करोड़ की साइबर ठगी ने हिला दी पूरी व्यवस्था
- bySagar
- 05 Jan, 2026
डिजिटल युग ने जहां जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधों का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है। हैदराबाद से सामने आया 7 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कैसे शातिर ठग डर और फर्जी पहचान के दम पर किसी की पूरी जीवनभर की कमाई लूट सकते हैं।
इस मामले में 81 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति को दो महीने तक मानसिक दबाव में रखकर “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर ठगा गया।
ठगी की शुरुआत कैसे हुई?
27 अक्टूबर 2025 को बुजुर्ग को व्हाट्सऐप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एक कूरियर कंपनी का कर्मचारी बताया और कहा कि मुंबई से थाईलैंड भेजे जा रहे एक पार्सल में ड्रग्स, पासपोर्ट और लैपटॉप मिले हैं, जो पीड़ित के नाम पर बुक था।
जब बुजुर्ग ने इन आरोपों से इनकार किया, तो कॉल किसी और व्यक्ति को ट्रांसफर कर दी गई, जिसने खुद को मुंबई पुलिस का वरिष्ठ अधिकारी बताया।
डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया
फर्जी पुलिस अधिकारी ने बुजुर्ग पर ड्रग तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी गतिविधियों जैसे गंभीर आरोप लगाए। उसे बताया गया कि वह डिजिटल अरेस्ट में है और किसी से संपर्क नहीं कर सकता।
डर के माहौल में उससे कहा गया कि उसकी आर्थिक जांच की जाएगी। इसी बहाने उससे पहले 19.80 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।
Signal ऐप से रखी गई निगरानी
29 अक्टूबर को ठगों ने पीड़ित से Signal ऐप डाउनलोड करवाया। इसी ऐप के जरिए उस पर लगातार नजर रखी गई और मानसिक दबाव बनाया गया।
आने वाले दिनों में उससे म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाए गए। धीरे-धीरे कुल 7.12 करोड़ रुपये ठगों के खातों में ट्रांसफर हो गए।
पैसा वापस मिलने का झांसा
ठगों ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद पूरा पैसा लौटा दिया जाएगा। इसी भरोसे में बुजुर्ग चुप रहे।
29 दिसंबर को ठगों ने फिर संपर्क किया और 1.2 करोड़ रुपये और मांगे। यहीं से बुजुर्ग को शक हुआ।
सच्चाई कैसे सामने आई?
अखबारों में डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से जुड़ी खबरें पढ़ने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे एक बड़े साइबर जाल में फंस चुके हैं। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
यह मामला क्यों है चेतावनी?
यह केस बताता है कि साइबर अपराधी:
- फर्जी पुलिस बनकर कॉल करते हैं
- डर और अकेलेपन का फायदा उठाते हैं
- बुजुर्गों को आसान निशाना मानते हैं
- एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से कैसे बचें?
- पुलिस कभी फोन या ऐप पर पैसे नहीं मांगती
- “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं
- डर में आकर कोई ट्रांजैक्शन न करें
- अनजान व्यक्ति के कहने पर ऐप डाउनलोड न करें
- परिवार या नजदीकी पुलिस से तुरंत संपर्क करें






