डिजिटल फ्रॉड पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बैंकों को फटकार; RBI से पूछा—क्यों नहीं बने कड़े नियम
- bySagar
- 09 Feb, 2026
डिजिटल फ्रॉड, खासकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ रही घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बैंकों की पहली जिम्मेदारी ग्राहकों की सुरक्षा है, लेकिन संदिग्ध लेन-देन को समय रहते रोकने में गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से भी सवाल किया कि इतने बड़े पैमाने पर नुकसान के बावजूद सख्त नीतिगत फैसले क्यों नहीं लिए गए।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की, जब केंद्र सरकार ने गृह मंत्रालय (MHA) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा दाखिल की गई स्टेटस रिपोर्ट पर सुनवाई की।
ग्राहकों की सुरक्षा पर उठे सवाल
कोर्ट ने कहा कि संदिग्ध ट्रांजेक्शन को समय पर फ्लैग न किया जाना बेहद गंभीर मुद्दा है। न्यायालय ने विशेष रूप से बुजुर्गों के मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके लिए यह नुकसान पूरी जिंदगी की कमाई के बराबर होता है। अदालत ने बैंकों की कार्यशैली और प्रोफेशनलिज़्म पर सवाल उठाते हुए पूछा कि शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।
ट्रांजेक्शन सस्पेंड क्यों नहीं होते?
पीठ ने यह भी सवाल किया कि जब किसी खाते में असामान्य गतिविधि दिखती है, तो ट्रांजेक्शन को तुरंत सस्पेंड क्यों नहीं किया जाता। साथ ही, ग्राहकों और साइबर क्राइम पुलिस को अलर्ट भेजने की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती, जबकि तकनीकी रूप से यह संभव है।
कोर्ट ने कहा कि सरकारी और निजी दोनों तरह के बैंक ग्राहकों को असुविधा से बचाने के नाम पर समय पर हस्तक्षेप नहीं करते, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है।
सरकार का पक्ष
अटॉर्नी जनरल ने अदालत को बताया कि डिजिटल अरेस्ट मामलों से निपटने के लिए SOPs को अंतिम रूप देने पर काम चल रहा है। MHA और MeitY ने दो स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की हैं, जबकि RBI ने बैंकों की शिकायत निवारण प्रक्रिया को लेकर एक ड्राफ्ट SOP तैयार किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने MHA को 2 जनवरी 2026 को तैयार SOP को औपचारिक रूप से लागू करने का निर्देश दिया और चोरी गए पैसों की रिकवरी के लिए एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने को कहा।
RBI पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने RBI से पूछा कि जब सार्वजनिक रिपोर्टों में यह सामने आया है कि डिजिटल फ्रॉड के जरिए ₹54,000 करोड़ से अधिक की राशि विदेश भेजी जा चुकी है, तो सख्त नियम क्यों नहीं बनाए गए। कोर्ट ने यह भी कहा कि रिटायर्ड लोगों और छोटे जमाकर्ताओं के खातों से अचानक बड़े ट्रांजेक्शन को जरूर फ्लैग किया जाना चाहिए।
अदालत ने संकेत दिया कि वह इस मामले में आगे और निर्देश जारी कर सकती है और चार सप्ताह बाद नई स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।





