ऑनलाइन दोस्ती बन सकती है बड़ा खतरा, बच्चों को साइबर ठग बना रहे हैं शिकार, ऐसे रखें पूरी तरह सुरक्षित
- bySagar
- 08 Feb, 2026
Cyber Safety for Children: डिजिटल दुनिया में बच्चों की बढ़ती मौजूदगी अब सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह उनकी सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और चैट प्लेटफॉर्म्स पर बनने वाली ऑनलाइन दोस्ती का गलत फायदा साइबर अपराधी उठा रहे हैं। मासूम तस्वीरों का दुरुपयोग कर बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे पैरेंट्स और समाज दोनों की चिंता बढ़ गई है।
कैसे बच्चों को निशाना बना रहे हैं साइबर अपराधी?
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अपराधी बेहद चालाकी से बच्चों को अपने जाल में फंसाते हैं। अक्सर यह प्रक्रिया कुछ इस तरह होती है:
- ऑनलाइन गेम या सोशल मीडिया पर अनजान लोग दोस्ती का भरोसा जीत लेते हैं
- बच्चे मासूमियत में अपनी फोटो या निजी जानकारी साझा कर देते हैं
- बाद में इन्हीं तस्वीरों को AI टूल्स या एडिटिंग ऐप्स से मॉर्फ कर आपत्तिजनक रूप दे दिया जाता है
- इन फर्जी तस्वीरों को सोशल मीडिया या ग्रुप्स में फैलाकर बच्चे को डराया, शर्मिंदा या ब्लैकमेल किया जाता है
इसका मकसद सिर्फ मज़ाक नहीं, बल्कि मानसिक दबाव बनाना और कई बार पैसे या निजी जानकारी ऐंठना भी होता है।
बच्चों पर पड़ता है गहरा मानसिक असर
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की साइबर घटनाएं बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती हैं। ऐसे बच्चे:
- खुद को इस घटना के लिए जिम्मेदार मानने लगते हैं
- दोस्तों और स्कूल से दूरी बनाने लगते हैं
- एंग्जायटी, डर और डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं
- कुछ मामलों में आत्म-नुकसान जैसे खतरनाक विचार भी आ सकते हैं
यही वजह है कि समय रहते सतर्कता और सही कदम बेहद जरूरी हैं।
माता-पिता के लिए जरूरी सावधानियां
साइबर एजेंसियां और विशेषज्ञ पैरेंट्स को कुछ अहम सलाह देते हैं:
- बच्चों को समझाएं कि ऑनलाइन किसी अनजान व्यक्ति के साथ फोटो साझा न करें
- यह साफ बताएं कि एक बार फोटो इंटरनेट पर गई तो उस पर नियंत्रण नहीं रहता
- बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर नजर रखें, लेकिन भरोसे के साथ बातचीत बनाए रखें
- डराने के बजाय उन्हें खुलकर अपनी बात कहने का मौका दें
अगर फोटो का दुरुपयोग हो जाए तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत एक्शन लेना जरूरी है:
- सबूत सुरक्षित रखें – स्क्रीनशॉट, लिंक और चैट रिकॉर्ड
- बच्चे को अकेला न छोड़ें – उसे भावनात्मक सहारा दें
- तुरंत शिकायत दर्ज करें –
गृह मंत्रालय के तहत Indian Cyber Crime Coordination Centre के साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करें - जरूरत पड़े तो स्कूल प्रशासन और काउंसलर को भी जानकारी दें
डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं, बल्कि संवाद, समझ और भरोसे का सवाल है। सही जानकारी और समय पर कदम उठाकर साइबर खतरों से बच्चों को सुरक्षित रखा जा सकता है





