साइबर फ्रॉड अलर्ट: पेंशन बोनस के नाम पर बुजुर्गों से ठगी, सरकार ने जारी की सख्त चेतावनी
- bySagar
- 08 Jan, 2026
देशभर में साइबर अपराधी अब रिटायर्ड बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं। पेंशन ‘बोनस’ या अतिरिक्त लाभ का लालच देकर ठग खुद को बैंक या सरकारी अधिकारी बताकर बुजुर्गों से संवेदनशील जानकारी हासिल कर रहे हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार और साइबर एजेंसियों ने गंभीर चेतावनी जारी की है।
भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के अनुसार, साइबर ठग लीक हुए डेटा का इस्तेमाल कर पेंशनधारकों का भरोसा जीतते हैं। इसके बाद वे ओटीपी मांगकर मिनटों में बैंक खाते खाली कर देते हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) समेत कई बैंकों ने भी पेंशनर्स को ऐसे कॉल और मैसेज से सतर्क रहने की सलाह दी है।
बुजुर्गों को क्यों बनाया जा रहा है निशाना
विशेषज्ञों के अनुसार, रिटायर्ड बुजुर्गों की आय मुख्य रूप से पेंशन पर निर्भर होती है और वे डिजिटल फ्रॉड के नए तरीकों से पूरी तरह परिचित नहीं होते। साइबर अपराधी इसी कमजोरी का फायदा उठाकर उन्हें अतिरिक्त पेंशन, बोनस या बकाया राशि का झांसा देते हैं।
कई मामलों में ठगों के पास पेंशनर का नाम, बैंक या PPO से जुड़ी जानकारी पहले से होती है, जिससे कॉल वास्तविक लगती है।
कैसे होती है पेंशन बोनस के नाम पर ठगी
यह ठगी आमतौर पर फोन कॉल या मैसेज से शुरू होती है। ठग खुद को पेंशन विभाग या बैंक अधिकारी बताकर कहते हैं कि आपके खाते में विशेष बोनस या पेंशन अपडेट किया जा रहा है।
ठगी के दौरान अपनाए जाने वाले तरीके:
- ओटीपी साझा करने का दबाव
- बैंक या डेबिट कार्ड की जानकारी मांगना
- लाइफ सर्टिफिकेट या PPO अपडेट का बहाना
- पेंशन बंद करने की धमकी देना
जैसे ही ओटीपी साझा किया जाता है, ठग मोबाइल या नेट बैंकिंग के जरिए रकम ट्रांसफर कर लेते हैं। हाल ही में केरल सहित कई राज्यों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां डेटा लीक के जरिए ठगों ने भरोसा जीतकर लाखों रुपये ठग लिए।
सरकार और बैंकों की चेतावनी
सरकार ने ‘साइबर दोस्त’ जैसे अभियानों के माध्यम से स्पष्ट किया है कि पेंशन या सरकारी लाभ के लिए कभी भी फोन पर ओटीपी या पिन नहीं मांगा जाता। बैंक भी बार-बार चेतावनी दे चुके हैं कि वे केवल आधिकारिक माध्यमों से ही संपर्क करते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जागरूकता ही इस तरह की ठगी से बचने का सबसे मजबूत हथियार है।
कैसे रहें सुरक्षित
बुजुर्ग और उनके परिवार निम्न सावधानियां अपनाकर ठगी से बच सकते हैं:
- किसी भी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, पिन या बैंक डिटेल्स न दें
- अनचाही कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें
- बैंक या पेंशन से जुड़ी जानकारी स्वयं आधिकारिक स्रोत से जांचें
- संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें
- बैंक खातों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन मजबूत रखें
- किसी भी संदेह की स्थिति में परिवार से सलाह लें
पेंशन से संबंधित जानकारी के लिए आधिकारिक हेल्पलाइन 1800-11-1960 पर संपर्क करें।
ठगी होने पर कहां करें शिकायत
अगर आप या आपके परिचित इस तरह की ठगी का शिकार हो जाएं:
- तुरंत साइबरक्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें
- ऑनलाइन शिकायत के लिए आधिकारिक साइबर पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करें
- नजदीकी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराएं
विशेषज्ञों का कहना है कि जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होती है, उतनी ही अधिक रकम वापस मिलने की संभावना रहती है।
डिजिटल युग में साइबर ठगों के तरीके लगातार बदल रहे हैं और बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। पेंशन बोनस के नाम पर होने वाली ठगी विश्वास और जल्दबाजी का फायदा उठाती है। सही जानकारी, सतर्कता और समय पर शिकायत ही इस खतरे से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।






