भारत में डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) और रूपे कार्ड का बड़ा योगदान रहा है। लाखों लोग रोजाना UPI का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन अब इस सेवा के महंगा होने की खबरें सामने आ रही हैं। सरकार ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है, जिससे न केवल ग्राहकों पर असर पड़ेगा, बल्कि इंडस्ट्री को भी करीब 600 करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है।
UPI पर सब्सिडी में बड़ी कटौती
सरकार ने हाल ही में UPI और रूपे कार्ड के ट्रांजैक्शन्स पर दी जाने वाली सब्सिडी में 60% की कटौती की घोषणा की है। अब तक यह सब्सिडी छोटे ट्रांजैक्शन्स, यानी 2,000 रुपये से कम के लेनदेन पर दी जाती थी, लेकिन अब इसे घटाकर 1,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पिछले साल यह सब्सिडी 3,681 करोड़ रुपये थी। इस कटौती से साफ है कि अब ग्राहकों को मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का भार उठाना पड़ सकता है।
UPI का उपयोग कैसे महंगा होगा?
अब तक सरकार द्वारा दी गई सब्सिडी के कारण UPI यूजर्स को किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता था। लेकिन सब्सिडी में इस कटौती के बाद, बैंकों और पेमेंट गेटवे को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए ग्राहकों पर चार्ज बढ़ाया जा सकता है।
इंडस्ट्री को 600 करोड़ का घाटा संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इस फैसले से इंडस्ट्री को लगभग 600 करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है। वर्तमान में हर साल लगभग 17 बिलियन ट्रांजैक्शन्स UPI के माध्यम से होती हैं, जिनकी कुल वैल्यू 24 लाख करोड़ रुपये होती है। अगर मर्चेंट्स को डिस्काउंट रेट का भुगतान करने के लिए कहा जाता है, तो इसका सीधा असर व्यापारियों और ग्राहकों पर पड़ेगा।
रूपे डेबिट कार्ड पर स्थिति अस्पष्ट
रूपे डेबिट कार्ड पर मिलने वाली सब्सिडी को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में यह देखना होगा कि क्या रूपे कार्ड यूजर्स को भी अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ेगा।
क्या UPI का उपयोग घटेगा?
इस निर्णय के बाद यह सवाल भी उठता है कि क्या UPI के उपयोग में कमी आएगी। अगर अतिरिक्त चार्ज लगाया जाता है, तो छोटे व्यापारियों और आम ग्राहकों के लिए डिजिटल पेमेंट्स महंगे हो सकते हैं, जिससे लोग कैश की ओर लौट सकते हैं।
सरकार का रुख
सरकार का मानना है कि सब्सिडी में कटौती से सरकारी खजाने पर भार कम होगा, लेकिन इसका असर डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर पड़ सकता है। हालांकि, यह देखा जाना बाकी है कि इस कदम के बाद इंडस्ट्री और ग्राहक किस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं।
UPI और रूपे कार्ड का उपयोग बढ़ाने के लिए सरकार ने कई प्रयास किए हैं, लेकिन सब्सिडी में कटौती से डिजिटल पेमेंट्स के महंगा होने की संभावना है। अगर इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो इसका असर डिजिटल इंडिया के मिशन पर भी पड़ सकता है।




