RBI की बड़ी कार्रवाई: गाइडलाइंस का पालन न करने पर इन बैंकों पर लगा भारी जुर्माना

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गाइडलाइंस का पालन न करने के कारण कई बैंकों पर कड़ा जुर्माना लगाया है। HDFC बैंक पर केवाईसी (KYC) नियमों का पालन न करने के कारण 75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं, पंजाब एंड सिंध बैंक पर भी 68.20 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया गया है।

HDFC बैंक पर क्यों हुई कार्रवाई?

आरबीआई ने बताया कि HDFC बैंक पर यह जुर्माना बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 46(4)(i) और 47A(1)(c) के तहत लगाया गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 की स्थिति को देखते हुए बैंक का एक विधिक निरीक्षण किया गया था। इसके बाद बैंक को नोटिस जारी किया गया था। जांच के दौरान पाया गया कि बैंक ने कुछ ग्राहकों को जोखिम के आधार पर निम्न, मध्यम या उच्च श्रेणी में वर्गीकृत नहीं किया। इसके अलावा, बैंक ने कई ग्राहकों को एक विशिष्ट ग्राहक पहचान कोड (Unique Customer Identification Code) देने के बजाय, कई ग्राहकों को अलग-अलग कोड जारी कर दिए। इसी वजह से आरबीआई ने यह कड़ी कार्रवाई की।

पंजाब एंड सिंध बैंक पर क्यों लगा जुर्माना?

आरबीआई ने पंजाब एंड सिंध बैंक पर भी बैंकिंग नियमों का उल्लंघन करने के कारण कार्रवाई की है। बैंक पर 68.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 46(4)(i), 51(1) और 47A(1)(c) के तहत की गई है। आरबीआई द्वारा बैंक को नोटिस भेजने और बैंक की प्रतिक्रिया की समीक्षा के बाद यह स्पष्ट हुआ कि बैंक ने दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया था। इसी कारण आरबीआई ने इस पर कड़ा जुर्माना लगाया।

NBFC कंपनियों पर भी कार्रवाई

बैंकों के अलावा, आरबीआई ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) KLM Exiva Finvest पर भी 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कंपनी नॉन-डिपॉजिट लेने वाली मिड-लेयर NBFC है। कंपनी ने आरबीआई द्वारा जारी किए गए 'NBFC-स्केल बेस्ड रेगुलेशन 2023' के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया था। इसी कारण आरबीआई ने इस पर कार्रवाई की।

बैंकों और NBFC के लिए बड़ा संदेश

आरबीआई की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों को सभी नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। यदि कोई बैंक या NBFC नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे ग्राहकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहेगी।