पिग बुचरिंग स्कैम: बेरोजगार युवाओं और गृहिणियों के लिए बढ़ती ऑनलाइन धोखाधड़ी

पिग बुचरिंग स्कैम एक प्रकार की ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी है, जो विशेष रूप से बेरोजगार युवाओं, हाउसवाइफ्स और छात्रों को निशाना बनाती है। इसमें ठगों द्वारा फर्जी निवेश योजनाओं के माध्यम से लोगों को क्रिप्टोकरेंसी जैसे आकर्षक निवेश विकल्पों में पैसा लगाने के लिए फंसाया जाता है। इस धोखाधड़ी का मुख्य उद्देश्य पीड़ित से पैसे ठगना और उनका व्यक्तिगत डेटा चुराना है। यह एक वैश्विक समस्या बन चुकी है, और इसके खिलाफ सरकार सक्रिय रूप से कार्रवाई कर रही है।

पिग बुचरिंग स्कैम का तरीका

पिग बुचरिंग स्कैम में ठग फर्जी पहचान बनाकर ऑनलाइन लोगों से संपर्क करते हैं। वे खुद को एक निवेश विशेषज्ञ या आकर्षक व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करते हैं, और चुराई गई या AI-जनित तस्वीरों के माध्यम से विश्वास अर्जित करते हैं। इसके बाद, वे सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स, या रैंडम कॉल्स के जरिए शिकार को जाल में फंसाने का प्रयास करते हैं। ये धोखेबाज पहले निवेश की कोई बात नहीं करते, बल्कि कई महीनों तक शिकार से बातचीत कर एक भावनात्मक संबंध स्थापित करते हैं।

जब ठग का विश्वास प्राप्त हो जाता है, तो वे पीड़ित को क्रिप्टोकरेंसी या विदेशी मुद्रा में निवेश करने के लिए राजी करते हैं। निवेश के बाद, वे उन्हें एक नकली निवेश ऐप पर खाता बनाने के लिए कहते हैं, जहां पीड़ित थोड़ी रकम जमा करते हैं। इस दौरान, ठग उनसे अधिक पैसे निवेश करने का दबाव डालते हैं, यह दिखाकर कि वे लाभ कमा रहे हैं। जैसे ही ठग अधिकतम राशि हड़प लेते हैं, वे अचानक गायब हो जाते हैं, वेबसाइट हटा देते हैं, और कभी-कभी पीड़ित की व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग भी करते हैं।

साइबर गुलामी का खतरा

यह धोखाधड़ी 2016 में चीन से शुरू हुई थी। साइबर अपराधी पहले शिकार से विश्वास जीतते हैं और फिर उन्हें धीरे-धीरे क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के लिए उकसाते हैं। एक बार जब पीड़ित बड़ी राशि निवेश कर देते हैं, तो ठग अचानक गायब हो जाते हैं, और पीड़ित को भारी आर्थिक नुकसान होता है। इस धोखाधड़ी के एक अन्य पहलू में पीड़ित को साइबर गुलामी का शिकार भी बनाया जा सकता है, जहां उन्हें लगातार अपनी पहचान और व्यक्तिगत जानकारी साझा करने के लिए मजबूर किया जाता है।

सरकार का कदम

भारत सरकार ने इस प्रकार की धोखाधड़ी से बचाव के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। गृह मंत्रालय के I4C (इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर) ने Google और फेसबुक के साथ मिलकर धोखाधड़ी से संबंधित जानकारी साझा की है और इस पर निगरानी रखी जा रही है। सरकार साइबर अपराधियों को पकड़ने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में जुटी हुई है ताकि इस तरह की ठगी को रोका जा सके।

नोट: ऑनलाइन निवेश करते समय सतर्क रहें और केवल प्रमाणित और विश्वसनीय प्लेटफ़ॉर्म पर ही निवेश करें।