2025 में भारत में साइबर अपराध का कहर: 20,000 करोड़ रुपये की ठगी का अनुमान, CloudSEK की रिपोर्ट

CloudSEK की हालिया साइबर सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत में साइबर अपराध से होने वाले वित्तीय नुकसान का अनुमान लगभग 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि डिजिटल धोखाधड़ी तेजी से बढ़ रही है और अपराधी ब्रांड इम्पर्सनेशन, फ़िशिंग और नकली मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल कर लोगों और व्यवसायों को निशाना बना रहे हैं।

बढ़ते साइबर खतरों के बीच, बैंकिंग, ई-कॉमर्स और सरकारी क्षेत्र पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है। साइबर धोखाधड़ी के 25 लाख से ज्यादा मामलों की रिपोर्ट सामने आई है, जिससे अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

कैसे हो रही है अरबों की ठगी? साइबर धोखाधड़ी अब केवल फ़िशिंग ईमेल या नकली कॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित अपराध उद्योग बन चुका है। अपराधी प्रसिद्ध ब्रांड्स की नकल कर नकली वेबसाइट्स और मोबाइल ऐप्स बनाते हैं। ये ऐप्स असली सेवाओं की तरह दिखते हैं और लोगों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने या अवैध लेनदेन करने के लिए बहकाते हैं।

CloudSEK की रिपोर्ट में 200 कंपनियों, 16,000 ब्रांड्स और 5,000 नकली डोमेन हटाने के मामलों का विश्लेषण किया गया है। इसमें इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के आंकड़े भी शामिल हैं, जो बढ़ती साइबर धोखाधड़ी की गंभीरता को दर्शाते हैं।

कौन से सेक्टर को हो रहा है सबसे ज्यादा नुकसान? बैंकिंग और वित्तीय सेवा: ₹8,200 करोड़ रिटेल और ई-कॉमर्स: ₹5,800 करोड़ सरकारी और सार्वजनिक सेवाएँ: ₹3,400 करोड़ अन्य सेक्टर: ₹2,600 करोड़

ब्रांड इम्पर्सनेशन: एक बढ़ता साइबर खतरा ब्रांड इम्पर्सनेशन अपराधियों का पसंदीदा तरीका बन गया है, जहां वे प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को ठगते हैं। यह तरीका सभी साइबर धोखाधड़ी मामलों का लगभग एक तिहाई हिस्सा है और महंगे घोटालों का 70% कारण है।

फर्जी बैंकिंग वेबसाइट्स और मोबाइल ऐप्स - लॉगिन क्रेडेंशियल्स और व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी चुराने के लिए। ई-कॉमर्स धोखाधड़ी पोर्टल्स - प्रसिद्ध ऑनलाइन स्टोर्स की नकल कर खरीदारी करवाने के लिए। निवेश धोखाधड़ी - नकली स्टॉक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स और क्रिप्टोकरेंसी योजनाओं के माध्यम से।

रक्षा कैसे करें? ✔️ सत्यापन करें - किसी भी वेबसाइट, ईमेल या ऐप पर व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करें। ✔️ फ़िशिंग से बचें - बिन मांगी गई ईमेल या मैसेज पर निजी जानकारी न दें। ✔️ मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) का उपयोग करें। ✔️ नियमित रूप से वित्तीय गतिविधियों की जांच करें। ✔️ संदेहास्पद गतिविधियों की रिपोर्ट करें - भारतीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर संपर्क करें।

क्या भारत साइबर अपराध से निपटने के लिए तैयार है? भारत की डिजिटल प्रगति ने सुविधाएँ तो बढ़ाई हैं, लेकिन साइबर खतरों को भी जन्म दिया है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ साइबर अपराध से निपटने के प्रयास कर रही हैं, लेकिन अपराधी लगातार नई तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं।

जब तक कंपनियाँ, नियामक और लोग मिलकर सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं देते, तब तक साइबर अपराधी कमजोरियों का फायदा उठाते रहेंगे।

डिजिटल दुनिया में भरोसा हमेशा सत्यापित करना चाहिए और सतर्कता हमेशा सर्वोपरि होनी चाहिए।